All Posts (23)

कुछ सहमे कुछ गूँगे

कुछ सहमे कुछ गूँगे
शब्दों में एहसास पिरोता हूँ

कवि हूँ मेरे भाव कभी
आँसू की राह निकलते है
और कभी कविता की सीपी में
मोती सा पलते हैं
अपनी अभिलाषाओं की चादर में
छुप कर रोता हूँ
कुछ सहमे कुछ गूँगे
शब्दों में एहसास पिरोता हूँ


आज लेखनी थकी हुई
कुछ कहने को आतुर भी

Read more…

मदिरा सवैया


कान्ह कहें सुन मात हमें अब, ग्वाल सखा बुलवाय रहे,
भोर हुई कहते हम से चल, माखन दूध पिलाय रहे।
हेरत घेरत बात सुने मत, खींच करें समझाय रहे,
नेह करें सब ग्वाल मुझे पुनि, आकर हाथ मिलाय रहे।


सावन में मत शोर करो घन, प्रीत हिया सरसाय रहे,
याद दिला मत साजन क

Read more…

मदिरा सवैया


रंग गुलाल उड़े हर ओर अबीर सजा कर माथ पिया,
ढोल बजा कर ताल सजाकर फागुन गीत सुनाय हिया,
पावन प्रीत करे मनमीत पिला लव आसव मस्त किया,
खूब करे हुड़दंग मिले जब अंग हिया पट खोल दिया।

दृश्य बड़ा अभिराम घिरे घन याम घटा अति रोर करे,
चाँद घिरा घन बीच धरा तम भींच

Read more…

सुनो
तुम्हें पता है
जब तुम गहरी नींद की
बेख्याली में
कुनमुनाते हो
जाने क्यों करवट सी
बदलते बस यूं ही
मेरे सीने से लिपट जाते हो
तो
कितने प्यारे लगते हो..
वो उस दिन
हल्की सी बुंदिया में
भीगते सुस्ताते
आधी नींद आधी तन्द्रा
आधी झपकी में
बतियाते
मेरे ही

Read more…

गीत

जो उड़ना है तुझे ऊंचा परों को खोल के रख।
कसौटी वक्त की है हौसलों को तोल के रख।।

अभी आग़ाज़ है तेरा बहुत कुछ सीखना है।
कमर कसनी अभी बाकी है मुट्ठी भींचना है।
भले हालात हों कैसे भी बस ये सोच ले तू।
यही ज़िद है यही है रार बस अब जीतना है।

लिखूँगा खुद नई तकदीर अपने

Read more…

उठो धनुर्धर! (गीत)

उठो धनुर्धर! बैठ गए क्यों?
उठो पार्थ! क्यों बैठ गए हो?
रण तो पूरा बचा हुआ है।

समर भूमि में वीर तुम्हारे,
मन में अंतर्द्वंद चल रहा।
भाव-हृदय से टकराए हैं,
नयन नीर विष्यन्द चल रहा।

उठो! तुरत गांडीव उठाओ, वीर! हार मत मानो तुम।
समर शेष को पूर्ण करो, यदि; रग में

Read more…

ये हिज्र है ना विसाल है
बस मुहब्बतों का ज़वाल है
तुझे चाहता है कोई आज भी
बस उन्ही चाहतों का सवाल है

तुझे देख ले जो कोई शब ओ सहर
तेरी इनायतों के हो पेशतर
ये जो गुलों की हैं खुशबुएँ
तेरे संदली हुस्न की मिसाल हैं

ये खूबसूरत वादियां
ये परिंदो की शादियां
तेर

Read more…

तुम सूर्य हो...


प्रचंडता प्रखरता प्रकाश
का प्रसार हो
कुछ यूं करो के
सब तरफ
आस का संचार हो
हाँ तुम्हीं बस तुम्हीं हो
एक अखण्ड सूर्य
तुम्हारी रश्मियाँ गिरें तो
जीवंतता विस्तार हो
मिलो कभी विश्वास से
प्रेम से उत्साह से
भूल कर सभी सवाल
संदेह और विवाद को
आलोक का बनो स्

Read more…

कुछ यूं ही.....

कुछ लम्हे बोए हैं मैंने

बस यहीं
इसी जगह...
कुछ हँसी के
कुछ रुलाई के
कुछ प्यार भरे
कुछ बेवफाई के
एक कलम भी बोई है
दिल के कठगुलाब की
एक बिरवा भी है
दोस्ती की तुलसी का
सच कहूं
उम्मीद नहीं ज़िद है
खरपतवार हटाना है
हर पौधे को
लहलहाना है
फूल कलि

Read more…

मौन है...

तरस रही हैं
बाहें
अधरों का मधुमास
मौन है
रुका रुका सा है दर्द
आँखों का सैलाब
मौन है
तुम आ क्यों नहीं जाते
सारी बहार
मौन है
सुनो कुछ
कहना है तुम से
बातों का संवाद
मौन है
कभी तो जलोगे
तुम भी
कभी तो रंग लाएगी
हिना
प्रतीक्षारत तन मन की
हर प्यास
मौन है..

Read more…

प्रतिक्षाएँ

प्रतिक्षाएँ
मौन हुआ करती हैं
खण्डहर सी वीरान भी
मौन सी निस्तब्ध भी
परन्तु
यह प्रतीक्षा कुछ अजीब थी
किसी नई किताब सी
जिसका पहला पृष्ठ खुला
और
वहीं कोने में छूट गया
शाम को बिस्तर पर
औंधा पड़ा
बस वहीं छूट गया।
पता नहीं कब
वक्त उठ कर
आगे चला गया
सदियों की

Read more…

कुछ तुम से....

कुछ कहना था तुम से
वो हर बार
तुम्हारे दरवाज़े के
आगे से निकलते हुए
उस बड़े से ताले को
देखा था तो...
तुम्हें याद किया था।
वो उस दिन
किसी पुरानी सहेली ने
पिछली गली में छूटी
तुम्हारी बातों को
दोहराया था तो...
तुम्हें याद किया था।
यूँ ही चलते चलते
रोज को

Read more…

कविता

भौतिकता

कितने अच्छे थे वो लम्हे जब सपने छोटे होते थे ;

छोटी खुशियाँ, छोटे ग़म थे, हम संग संग हँसते रोते थे ;

आज न जाने कैसे सपने देख रहे हैं नैन हमारे ?

कि नींद उचट जाती रातों में, छिन रहे हैं चैन हमारे ;

इक छोटे से घर का सपना तब्दील हो गया इमारत में,

अमन च

Read more…

कविता

अजन्मी बेटी की गुहार
******************
जीने का अधिकार मुझे दे.....
ओ मेरी मैया, सुन मेरी मैया,
बस थोड़ा सा प्यार मुझे दे.....

माटी से
और रंगों से
ईश्वर मुझको बना रहा है ;
तू भी कर इसमें सहयोग -
वरना मेरे जीवन का
हो न सकेगा संयोग -
तेरे लहू और दूध बिना -
कैसे वि

Read more…

कविता

जड़---

-------

धरती के अन्दर

आँख खोलते ही

वो इठलाती है

बाहें  फैलाती है

और गर्व से

फूल जाती है

कि उस से ही है

पेड का जीवन

पर उसका अपना

वज़ूद क्या है

आसमान से कम

क्या होगा!

बाहें पसारती है

फल फूल पत्तों से

खुद को सजाती

संवारती है

फिर इन्तज़ार करती है

कोई आयेगा उसे स

Read more…

प्रेम के वशीभूत

प्रेम के वशीभूत
==========

तुम्हारी यादों में
तुम्हें सोचते हुए
पता न चला
कब आँख लगी
कब ख़्वाबों को पर मिल गये।

अचानक ही
एक स्पर्श हुआ
चिर परिचित
नींद गायब
आँखों में चमक उतर आई ।

मैं तुम्हें चूमने लगा
प्यार करने लगा
आलिंगन बद्ध रहा
कब तक? पता नह

Read more…

धूल का बिस्तर

मुबारक फ्लैट आलीशान तुमको
मुबारक फ्लैट के वो लग्ज़री कमरे
मुबारक सुर्ख मखमल का शबिस्तां भी तुम्हें
मगर ज़रदार इंसानो
तुम अपने मखमली बिस्तर पे सो जाने से पहले
उसे हाथों से छूकर देखना
महसूस करना, सोचना
ये सच में लाल मखमल है
या उस मुफ़लिस बदन के खून के क़तरे बि

Read more…

दरियाओं के संग बहता था,
अपने अंदर खुश रहता था,
हर ग़म को हँस कर सहता था,
गीत, ग़ज़ल नज़्में कहता था।

जैसे हाथों बीच समंदर,
जाने कौन था मेरे अंदर।

आसमान पर नज़र टिका कर,
गहरे पानी भीतर जा कर,
सुख दुख के कुछ मोती पाकर
तन्हाई में नग्में गाकर,

जीता जैसे मस्त कलंदर,
जाने

Read more…

कह मुकरियां

हर पल मेरा तन मन लूटे
वादे करता रहता झूठे
मीठी बातें कटु व्यवहार
क्यों सखि साजन? नहीं संसार।

रूप रंग का है बस लोभी
बनता याचक पूरा भोगी
बांधे झूठे सभी सम्बन्ध
क्यों सखि साजन? नहीं मारिन्द।

मुश्किल में जो राह बताए
बिन मांगे ही जान लुटाए
प्रेम त्याग ही

Read more…

गुड़ियों से खिलौनों से
मां की गोद के नरम
बिछौनों से
चूरन की गोली से
स्कूल कॉलेज के
चुपचाप कोनों से
जाने कब हम निकल कर
कहीं दूर खड़े हो गए...!
हम आज कुछ और
बड़े हो गए...!
एक आशियाने की तलाश में
सर टिकाने के हसरत लिए
किसी शाने की तलाश में
तेरी पनाहों तक

Read more…

प्रयागराज - लखनऊ - कानपुर - नोएडा - नई दिल्ली - चंदौसी - मेरठ - साँईखेड़ा - इंदौर - भोपाल - जयपुर - आगरा

Designed and managed by Shesh Dhar Tiwari for Sukhanvar International