Speech Weaver : Ghazal : Rakh ke sar kandhe pe tere kabhi ro kar dekhu

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रख के सर काँधे पे तेरे कभी रो कर देखूँ अपने एहसास में आ तुझको भिगो कर देखूँ ख्वाब मुद्दत से परीशां हैं कहीं नींद मिले इनकी ख़ातिर ही सही कुछ घड़ी सो कर देखूँ...

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