पत्थर न फेंकना कभी इस सायबान की तरफ़
मत डालना बुरी नज़र तू आसमान की तरफ़

जाता हुजूम है़ सदा ज़ोर-ए-बयान की तरफ़
मुड़कर न देखता कोई भी बे-ज़बान की तरफ़

दीदे निकाल कर तभी रख देंगे हाथ पर अहल
डाली बुरी निगाह जो हिन्दोस्तान की तरफ़

रक्खे ख़याल आपका हर वक़्त सुब्ह शाम ये
हैं आपके के भी फ़र्ज़ कुछ तो ख़ानदान की तरफ़

रिश्ते तमाम पास थे शादाब घर दयार था
तेरा फ़ुतूर ले गया तुझको मकान की तरफ़

मुस्तैद सरहदों पे हैं जाँ बाज मेरे देश के
देते न ध्यान आबलों पर या थकान की तरफ़

तोड़ी हैं जिसके वास्ते तुमने रिवायतें सभी
जाता न हो ये रास्ता आगे ढलान की तरफ़

यारो भटक के रास्ता गिरता वही जमीन पर
रखता नहीं निगाह जो अपनी उड़ान की तरफ़

इंसान पत्थरों में भी उस वक़्त ढूँढता ख़ुदा
जब खींचती है ज़िंदगी इक इम्तिहान की तरफ़
राजेश कुमारी राज

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