मेरी उपस्थिति


ग़ज़ल


इश्क़ ऐसा सफ़र है जहाँ, उलझनों के घुमाव भी हैं।
ग़म के परबत, कठिन रास्ते, और थकन के पडा़व भी हैं।।

 

दिन का सूरज झुलस देता है, मेरी उम्मीद का गुल्सिताँ।
भस्म करने को चैन-ओ- सुकूँ, रतजगों के अलाव भी हैं।।

 

तुझ से बिछडे़ तो, ए हमनशीं, गंमज़दा दिल की धड़कन हुई।
खु़श्क आँखों में पलकों तले, आसुँओं के बहाव भी हैं।।

 

रंगतें गुज़रे हालात की, शोखि़याँ वो ख़्यालात की।
दिल के आईने में आज तक, चाहतों के रचाव भी हैं।।

 

उफ..! ये माजी़ का ज़हरीलापन, डस गया आज का बाँकपन।
जिन से रिसता है दिल का लहू, रूह में ऐसे घाव भी हैं।।

 

तोड़ना रब्त आसाँ नहीं, दूर जाना भी मुमकिन नहीं।
माना ' मीना' हैं बेजा़रियाँ, फि़र भी उन से लगाव भी हैं।।

 

मीना नक़वी

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  • बेहतरीन ग़ज़ल

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