बेहिसों का चुनाव क्यों आख़िर
वोट का मोल भाव क्यों आख़िर

देश पहले है बाद में मज़हब
ज़ात से फिर लगाव क्यों आख़िर

पार करना है एक ही दरिया
चाहिए चार नाव क्यों आख़िर

एक भाई का जल रहा लाशा
दूसरे का अलाव क्यों आख़िर

मिल के आतंकियों से लड़ने में
मुजरिमों का बचाव क्यों आख़िर

देश अपना है देश के हम हैं
सोच में भेद भाव क्यों आख़िर

फ़ैसला ले अगर कोई संसद
ले के उसको तनाव क्यों आख़िर

 

 

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Replies

  • Wahh...wahhh..bahut sahi ..

    • Shukriya Nisha ji

  • बहुत ही उम्दा।सटीक,सामयिक ग़ज़ल।

    • धन्यवाद विप्रवर

  • वाह वाह।

    लाजवाब

    • शुक्रिया मीना जी।

  • वाह्ह्ह्ह्ह सर उम्दा ग़ज़ल , सच बयाँ करती हुई ! 

    • Shukriya Amit ji

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