इक राह के मुसाफ़िर, हम भी हैं और तुम भी
इक मुश्त ख़ाक आख़िर, हम भी हैं और तुम भी

अपने अलग ख़ुदा हैं, है मुख़्तलिफ़ परस्तिश
इस ज़ाविये से काफ़िर, हम भी हैं और तुम भी

अपनी इबादतों का, चाहें बदल हमेशा
इस तर्ह एक ताजिर, हम भी हैं और तुम भी

हमको गुरूर कितना इस जिस्म पर है लेकिन
सोचो तो बस अनासिर, हम भी हैं और तुम भी

हमको जहां में आकर पहचान क्या मिली है
समझो तो इक मुहाजिर, हम भी हैं और तुम भी

जब तुमको है शिकायत, हम को गिला है उससे
दर पर उसी के क्यों फिर, हम भी हैं और तुम भी

You need to be a member of Sukhanvar International to add comments!

Join Sukhanvar International

Email me when people reply –

Replies

This reply was deleted.

प्रयागराज - लखनऊ - कानपुर - नोएडा - नई दिल्ली - चंदौसी - मेरठ - साँईखेड़ा - इंदौर - भोपाल - जयपुर - आगरा

Designed and managed by Shesh Dhar Tiwari for Sukhanvar International