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Replies

  • कुछ अशआर

    1- तुम्हें देखता हूं सो ज़िंदा हूं मैं,
    मुझे सांस आती है आंखों से अब,
    2- हर कोने में तन्हाई है, हर कोने में सीलन भी,
    अच्छा तो ये दीवारें भी चुपके चुपके रोती हैं,
    3- ये कैसा राब्ता है दरमियां दोनों कि आंखों के,
    तेरी आंखों के आंसू भी मेरी आंखों से बहते हैं,
    4- गाओं की वो धूप खूं का रंग पक्का कर गयी,
    शहर के पक्के मकां में आदमी कच्चा दिखा,

  • ज़िंदा हूँ मैं, ये जान के जो लोग हों उदास
    उनको ख़बर करो कि अभी जी रहा हूँ मैं

  • परीशां है हर शख़्स ये सोचकर ही
    कि सोचेगी क्या मेरे बारे में दुनिया
    हक़ीक़त तो ये है कि फ़ुर्सत कहाँ है
    जो सोचेगी औरों के बारे में दुनिया

  • ये आँखों का आसूँ नही है फ़क़त
    बसी जिसकी यादें वही है फ़क़त

    ______माधुरी स्वर्णकार


  • दर्द सुनकर नदी के पानी का
    मेरी आँखों में भर गया पानी

    ______माधुरी स्वर्णकार

    • Bahut khoob


  • जो मिली काया वो इक दिन होनी है मिट्टी
    फक्र फिर किस बात का ये कहती है
    मिट्टी।।

     

    _______माधुरी स्वर्णकार

    • Achcha hai

  •  

    कुछ अश्आर

    1..

    ख़ुदपरस्ती की किसी शख़्स में शिद्दत देखें।
    अब ये सोचा है कि शद्दाद की जन्नत देखें ।।
    ===============
    2..

    कोई तहरीर मुस्तनद न हुई।
    दीमकें खा गयीं किताबों को।।
    ===============
    3..

    तुम ने इक लुत्फ़ की निगाह न की।
    ज़र्फ़ मेरा था, मैने आह न की।।
    ==============
    4..
    ये मंज़र , ये रुत और ये मौसम कहाँ।
    ये गुंचे , ये कलियाँ , ये शबनम कहाँ।
    अगर गर्दिश ए वक़्त यूँ ही रही।
    'ज़रा देर में तुम कहाँ हम कहाँ ।।'


    मीना नक़वी

    • Behtareen ashaar

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