बुधवार-हिंदी रचनाएँ (8)

गीतिका

स्वयं की हानि करनेसे अधिक उन्माद क्या होगा
जहां अग्नि हो जिह्वा पर...वहां संवाद क्या होगा

जहांपर न्याय की कुर्सीका हो अन्याय अधिकारी
वहां पर तर्क क्या होंगे.…वहां प्रतिवाद क्या होगा

हसें...बोलें...उठें...बैठें....भुला कर भेद भावों को
धरा की गोद से विस्तृत

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ग़ज़ल

जब से आया फसाद छंदों में
भर गया है मवाद.....छंदों में

सुन के आते हैं..दाद में आंसू
है बहुत आर्तनाद......छंदों में

इनको तो...निर्विवाद रहने दो
क्यों मिलाते हो..वाद छंदों में

कोई आये कबीर..या दिनकर
फूंक जाए निनाद......छंदों में

गीत ग़ज़लें हों.....शेर या दोहे
कब

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भाव की अभिव्यक्ति होती है सरल क्या

भाव की अभिव्यक्ति होती है सरल क्या
पढ़ रहे हो तुम मुखाकृति आज कल क्या

मिल गयी क्यों शक्ति इतनी दानवों को
पी लिया शिव ने निरर्थक ही गरल क्या

सृष्टि का हर एक मानव सोचता है
मृत्यु है संसार में सचमुच अटल क्या

चाँदनी का तरु तले अभिसार तम से
देखकर होता नहीं चंद

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5 Replies · Reply by SD TIWARI Dec 25, 2019

मैं ही भगिनी, मैं ही भार्या, मैं जननी बन आई हूँ

 

मैं ही भगिनी, मैं ही भार्या, मैं जननी बन आई हूँ
जो चाहे कह लो मैं अपने साजन की परछाई* हूँ

जोहूँ उनकी बाट, बिछाऊँ पलकें उनकी राहों में
मेरा सारा दर्द मिटे जब सिमटूँ उनकी बाहों में

कौन राम है कौन कृष्ण है मैं इन सब को क्या जानूँ

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घनाक्षरी छंद (मनहरन कवित्त)

घनाक्षरी छंद (मनहरन कवित्त)

यह एक वर्णिक छंद है जिसमे प्रत्येक चरण में 31 वर्ण होते है। 8,8,8,7 या 16, 15 पर यति और चरणान्त में गुरुवर्ण होना चाहिये।
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कजिया सबेरे वाली सँझिया क बरसात, 
बड़ा दुःख दे थ भैया ए से रह बचि

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बुद्धवार का कार्यक्रम

गीतिका

 

प्रेम के भावों में जब अवहेलना रक्खी गयी।
मेरे द्वारा फि़र नई प्रस्तावना रक्खी गयी।।

 

जिसने उपवन में सजाये मद भरे रंगीन फूल।
जाने क्यों उसके लिये ही ताड़ना रक्खी गयी।।

 

वृक्ष , पौधे और पशु तक अपने पन से भर गये।
मन में मानवता की जिस क्षण भावना रक्खी

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1 Reply · Reply by SD TIWARI Nov 20, 2019

कुछ दोहे

 

अंग अंग किसलय सदृश,रजत वर्ण सी देह।
कहो कुमुदिनी कामिनी,किसे न होगा नेह।।

क्षुधित वक्ष को भी मिले,आलिंगन भरपूर।।
निकट आ गयी हो प्रिये,अब मत जाना दूर।

राजनीति में आजकल,ऐसा ही है हाल।।
ज्यों सिंहों की खाल को,पहने मिले शृगाल।।

नेता इनको मत समझ,सोने वाले जाग।

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25 सितंबर 2019, हिंदी रचनाओं का कार्यक्रम

 

*Wednesday program*

*केवल हिंदी छंद-विधा पर आधारित रचनाएँ*

_गीत और नवगीत भी पोस्ट किए जा सकते हैं।_

*शुद्ध हिंदी में कही गयी ग़ज़लें भी पोस्ट की जा सकती हैं*

 

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11 Replies · Reply by SHIFA KAJGAONVI (ISMAT ZAIDI) Sep 25, 2019
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