nagun

अब कोई सर नगूं नहीं मिलता
इसलिए अब सुकूं नहीं मिलता

अक़्स। देखे हैं आईने देखे
दोस्त अब हू बहू नहीं मिलता

साज़े ग़म है सलीक़ा जीने का
कोई ख़ुशरू ख़ुज़ूअ नहीं मिलता

सब के सब ही मफ़ाद परवर हैं
कोई बे आरज़ू नहीं मिलता

मुद्द।आ क्या कहें दुआओं में
क़ल्बे रू। को वुज़ूअ़ नहीं मिलता

मंज़िलों की तो हमको हसरत है
हौंसलों में जु‌नूं‌ नहीं मिलता

छु प के रहता है जो रगे जां में
बस वही रूबरू नहीं मिलता

शहाब उद्दीन शाह क़न्नौज

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