ho gila tujhse hi to (1)

तू कभी मिल जाये तो इस बात का चर्चा करूँ
हो गिला तुझसे ही तो किससे ख़ुदा शिकवा करूँ

हर सुतूं मिस्मार है अब इस हिसारे जिस्म का
रूह जाने को ही राज़ी है नहीं तो क्या करूँ

धूप के मासूम टुकड़ों की है मुझसे आरज़ू
साथ उनके जब रहूँ तो उनपे मैं छाया करूँ

झुर्रियाँ

Read more…

प्रयागराज - लखनऊ - कानपुर - नोएडा - नई दिल्ली - चंदौसी - मेरठ - साँईखेड़ा - इंदौर - भोपाल - जयपुर - आगरा

Designed and managed by Shesh Dhar Tiwari for Sukhanvar International