Ghazal

सूखे फूलों को भी गुलदान में रक्खा हुआ है
शाहज़ादी ने हमें ध्यान में रक्खा हुआ है
سوکھے پھولوں کو بھی گلدان میں رکّھا ہوا ہے
شاہزادی نے ہمیں دھیان میں رکّھا ہوا ہے

हालते हिज्र पे तोहमत न लगा ऐ दुनिया
मैंने उस शख़्स को इम्कान में रक्खा हुआ है
حالت ہجر پے تہمت نہ لگا اے دنیا
میں نے اس شخص کو امکان میں رکّھا ہوا ہے

काफ़ी ताख़ीर से जागी है मोहब्बत तेरी
अब कोई और मेरी जान में रक्खा हुआ है
کافی تاخیر سے جاگی ہے محبّت تیری
اب کوئی اور میری جان میں رکّھا ہوا ہے

ग़ौर से सोचें तो हर शख़्स है सय्याद यहाँ
सबने ही रूह को ज़िन्दान में रक्खा हुआ है
غور سے سوچیں تو ہر شخص ہے صیّاد یہاں
سب نے ہی روح کو زندان میں رکّھا ہوا ہے

-Ahmad Azeem

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Comments

  • Zindabad Azeem. Behtareen ghazal.
  • Kya kehne hain bhayi
  • बहुत उम्दा वाहः
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