ग़ज़ल

ग़ज़ल
  1. साथ उनके उजाले गये
    ग़म अँधेरों में पाले गये

    हक़ जो माँगा किसी ने कभी
    उसपे   पत्थर   उछाले  गये

    इल्म  तो  साथ  मेरे  रहा
    चोर, फिर क्या उठा ले गये

    थी  रक़ीबों  की  बारादरी
    बज़्म से हम निकाले गये

    आप सच बोलकर दफ़अतन
    साख  अपनी  बचा  ले  गये

    - पुष्पेन्द्र 'पुष्प'

E-mail me when people leave their comments –

You need to be a member of Sukhanvar International to add comments!

Join Sukhanvar International

Comments

  • बेहतरीन ग़ज़ल। तहलीली रदीफ़ का उत्तम प्रयोग।
This reply was deleted.

प्रयागराज - लखनऊ - कानपुर - नोएडा - नई दिल्ली - चंदौसी - मेरठ - साँईखेड़ा - इंदौर - भोपाल - जयपुर - आगरा

Designed and managed by Shesh Dhar Tiwari for Sukhanvar International