ग़ज़ल

 

छलनी क़दम क़दम पे है सीना पहाड़ का
दूभर किया है किसने ये जीना पहाड़ का

चमके है दूर से जो नगीना पहाड़ का
बनता है देखते ही क़रीना पहाड़ का

चढ़ने लगे हैं आप जो ज़ीना पहाड़ का
लगता है बैठ जाएगा सीना पहाड़ का

भाता अगर है आपको जीना पहाड़ का
लेकर कहाँ से आएँगे सीना पहाड़ का

मैदां की प्यास और ये मीना पहाड़ का
महँगा पड़े न जाम ये पीना पहाड़ का

जो देखना है तुझको भी जीना पहाड़ का
सर्दी में आके काट महीना पहाड़ का

ये ग़ार-ग़ार सीना ये रिसता हुआ वजूद
दामन किया है आपने झीना पहाड़ का

है आपको पता भी कि बनिए की आँख में
चुभता है किस क़दर ये दफ़ीना पहाड़ का

सैलानियों ने फोड़ के दारू की बोतलें
छलनी किया है रोज़ ही सीना पहाड़ का

इमदाद हो कोई कि हिफ़ाज़त वतन की हो
आता है काम ख़ून पसीना पहाड़ का

साज़िश कुछ इस तरह हुई यारो पहाड़ से
सड़कों से आ के सट गया सीना पहाड़ का

ऐ दोस्त मेरे आँख का पानी बचा के रख
पानी तुझे जो साफ़ है पीना पहाड़ का

जागे नहीं तो यारो हमारे पहाड़ को
खा जाएगा वो सेठ कमीना पहाड़ का

गर चाहते हैं आप भी आना पहाड़ पर
मत भूलिएगा आप क़रीना पहाड़ का

हाथों को तेरे देखते हैं इस उम्मीद से
ऐ नाख़ुदा न डूबे सफ़ीना पहाड़ का

द्विजेंद्र द्विज

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Comments

  • आ0 द्विज जी बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई । पहले तो मैं भरम में पड़ गया कि क्या आपने पूरी ग़ज़ल मतले से ही पूरी करेंगे बाद में पता चला सभी हुस्ने मतला ही हैं 6 मतले के बाद शेर शुरू हुए ।

    उत्सुकता वस कुछ प्रश्न उठे हैं

    क्या आप से पहले भी किसी शायर ने ऐसा प्रयोग किया है जैसे ग़ालिब मीर आदि ।

    क्या इतने हुस्ने मतला रखने की मान्यता अरूज की तरफ से जायज़ है ।
    पहली बार ऐसी ग़ज़ल का दर्शन हुआ है इसलिए यह विचार आया ।
    • जिगर मुरादाबादी साहिब की ग़ज़ल

      *इक लफ़्ज़े मोहब्बत का अदना ये फ़साना है*
      में 9 हुस्ने मतला और 22 शेर हैं।
      • बहुत बहुत शुक्रियः आदरणीय
    • भाई जी एक ग़ज़ल में कई मतले हो सकते हैं जिन्हें हुस्ने मतला कहा जाता है।
  • ऐसी ग़ज़ल कहना आसान काम नहीं है साहब, बला की कारीगरी है ये।
    • कुछ ग़ज़लें लिखी जाती हैं। में भी लिखता हूँ , लेकिन यह ग़ज़ल हो गई थी भाई । शुक्रिया।
  • वाह बहुत खूब जी।
    • हार्दिक आभार
  • वाह वाह वाह
    • हार्दिक आभार
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