क़ाफ़िये पर अशआर

लज़्ज़ते वस्ल न अब दर्दे जुदाई मांगे,

ज़िन्दगी क़ैदे तमन्ना से रिहाई मांगे।

 

सर्दमेहरी के निशां सिर्फ़ दिलोजां पे नहीं,

ख़्वाब भी आंखों से पलकों की रज़ाई मांगे।

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Comments

  • बहुत खूब् वाहः वाहः
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