मुझे आप अगर आँख भर देखिएगा
तो चेहरे पे मेरे असर देखिएगा

भले बंद हो जाएँ साँसें हमारी
मगर वा हमेशा ही दर देखिएगा

दिखाएँगी बस आपका अक्स आँखें
ज़रा ग़ौर से आप अगर देखिएगा

भले मेरी बदहाली पर आप बदलें
मुझे तो यूँ ही उम्र भर देखिएगा

भले आज मेरे मुख़ालिफ़ खड़े हैं
मगर कल इधर और उधर देखिएगा

जो टकरायेंगे उनसे ग़मगीन बादल
पहाड़ों को भी तर ब तर देखिएगा

लगेगा मेरा झूठ भी आप को सच
कभी ख़ैरियत पूछ कर देखिएगा

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Comments

  • बेहतरीन।
  • Wahhhh....! Bahut khoob ..! Bahut sundar ...!
    • शुक्रिया निशा जी
  • bahut khoob. Bahut umda ghazsl hui hai
    • Bahut bahut shukriya sir ji.
  • वाह्ह्ह्ह बेहतरीन ग़ज़ल !
    • शुक्रिया अमित जी
  • वाह वाह बहुत उम्दा
    • शुक्रिया मीना जी
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