ग़ज़ल

ज़िन्दगी का न फैसला करते।
तो न जाने हम और क्या करते।
زندگی کا نہ فیصلہ کرتے
تو نہ جانے ہم اور کیا کرتے

उड़ने का हम जो हौसला करते।
आसमां को ज़मीन का करते।
ادنے کا ہم جو حوصلہ کرتے
آسماں کو زمین کا کرتے

इश्क में आप से वफ़ा करते।
हक मुहब्बत का यूँ अदा करते।
عشق میں آپسے وفا کرتے
حق محبّت کا یوں ادا کرتے

आपसे था जुदाई का जो खौफ।
मर न जाते तो और क्या करते।
آپسے تھا جدائی کا جو خوف
مر نہ جاتے تو اور کیا کرتے

याद का पंछी उड़ गया फिर से।
तेरी जानिब वफ़ा वफ़ा करते।
یاد کا پنچھی اد گیا پھر سے
تیری جانب وفا وفا کرتے

मुझको बरबाद कर के सोचे है।
और बुरा करते और बुरा करते।
مجھکو برباد کر کے سوچے ہے
اور برا کرتے اور برا کرتے

उम्र गुज़री कमाल अपनी तो।
इश्क की रोज़ इब्तदा करते।
امر گزری کمال اپنی تو
عشق کی روز ابتدا کرتے

केतन "कमाल" کتن کمال

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