उदासी छोड़ भी दे जो मुझे ...बेचैनियाँ तो हैं 
किसी की जुज़ तेरे भी .,,मुझ में यूँ  ..दिलचस्पियाँ तो हैं 

सिवा इक हिज्रे यारां कुछ मुझे मुश्किल नहीं लगता 
सुना है ज़िन्दगी में और भी ..दुश्वारियाँ तो हैं 

मेरे अशआर सारे कह न पाये कुछ कभी तुझ से 
मुखातिब आज तुझ से ...पर मेरी ये चुप्पियाँ तो हैं 

नया कुर्ता भी पहना है ...सँवारे बाल भी मैं ने 
तू आ या आ न ख़्वाबों में ..मेरी तैयारियाँ तो हैं 

हवायें ..आज जाने क्या ग़ज़ब ..मुझ से करायेंगी 
मै बेशक राख हूँ ...मुझ में मगर चिन्गारियाँ तो हैं  

मआनी फिर मुकम्मल का कोई कैसे समझ पाता 
खुदा का शुक्र है ...दुनिया में तेरी '..Selfiyan' तो हैं

मुसलसल खोया रहता हूँ न कुछ अब काम करता हूँ
निभाई इश्क़ की मैंने .. ये ज़िम्मेदारियाँ तो हैं

 

 

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Comments

  • ख़यालात उम्दा पिरोये हैं

    लेकिन कई मिसरे है जिनमें रवानी मजरूह है

    ज़रा सी फिक्र से उन्हें और रवां किया जा सकता था

    • जी सर
  • Wahhhh bahut umda ghazal bhai ji......

  • Waaaah kya khne sir

  • Lazwaab ghazal

    • Bahut shukriya Sis 

  • Lajwab

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