भाव की अभिव्यक्ति होती है सरल क्या
पढ़ रहे हो तुम मुखाकृति आज कल क्या

मिल गयी क्यों शक्ति इतनी दानवों को
पी लिया शिव ने निरर्थक ही गरल क्या

सृष्टि का हर एक मानव सोचता है
मृत्यु है संसार में सचमुच अटल क्या

चाँदनी का तरु तले अभिसार तम से
देखकर होता नहीं चंदा विकल क्या

भूल कर सामर्थ्य अपनी ही अकारण
कर रहे हैं आप अपने साथ छल क्या

जुगनुओं! अक्षोहिणी सेना बना कर
तुम हरा सकते नहीं तम को सबल क्या

मैं समय से लड़ रहा हूँ माँ अकेले
नेत्र तेरे स्वर्ग में भी हैं सजल क्या

शेषधर तिवारी

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Comments

  • Wahhhh....! Wa...!
    Bhool kar saamarth apni ...wahhh..!
    Main samay se lad raha hun ...! !! Superb...!
  • उत्तम, उत्कृष्ट!
  • उत्कृष्ट रचना
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