माँ का ध्यान रहे जब उधड़े रिश्तों की तुरपाई पर
बहुएँ ख़ुश हो जाती हैं बस रोटी की गोलाई पर

ढोल गवार शूद्र पशु नारी ताड़न के अधिकारी क्यों
बाहर चर्चा छिड़ी हुई है तुलसी की चौपाई पर

दद्दा बोले ताड़न माने समुचित देख भाल करना
छोटका है शैतान, निशाना है उसका भौजाई पर

ठेठ दुपहरी में ये बादल शुभ संकेत नहीं मुन्ना
खेतन में तैयार खड़ा है गेहूँ, लगौ कटाई पर

बच्चों तुम तो अपने अपने इम्तिहान की फ़िक्र करो
ध्यान लगा कर पाठ पढ़ो बाकी छोड़ो रघुराई पर

बागों पर सागर नदियों पर, कवि हैं आप लिखे होंगे
लिखिए मदमाते महुआ पर, बौराई अमराई पर

शेषधर तिवारी, प्रयागराज

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Comments

  • शानदार!
  • Raghuraai par.....! Rishton ki turpaai par...! Comman massages r kept in very different style ..jindabad sir
  • Wahhhh......wahhhh...!
    Fantastic...!!
  • wow..

    amazing poetry!!!!!
    • Shukriya Meena ji
  • वाह! बहुत ही उम्दा ग़ज़ल है।
    • Behad shukriya sir ji
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