2020 की पहली ग़ज़ल

2020 की पहली ग़ज़ल

ये भी मुमकिन है कि हमसे गुनाह हो जाये
ये भी मुमकिन है कि फिर भी निबाह हो जाये

ये भी मुमकिन है कि हो राह जानिबे मंज़िल
ये भी मुमकिन है कि मुश्किल ये राह हो जाये

ये भी मुमकिन है कि दोनों में प्यार हो ही नहीं
ये भी मुमकिन है ख़ुशी से निकाह हो जाये

ये भी मुमकिन है कि मुंसिफ़ गुनाह करने लगें
ये भी मुमकिन है अदल उन की चाह हो जाये

ये भी मुमकिन है कि अहबाब काट लें कन्नी
ये भी मुमकिन है अदू ख़ैरख़्वाह हो जाये

ये भी मुमकिन है कि बेज़ार आप से हों सब
ये भी मुमकिन है कि उसकी निगाह हो जाये

ये भी मुमकिन है कि उक्ताएँ ज़िन्दगी से आप
ये भी मुमकिन है कि जीने की चाह हो जाये

#शेषधर

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  • वाह वाह लाजवाब ग़ज़ल
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