आदमी तो आदमी है क्या हुआ गुमनाम है
है नहीं बदनाम, तो ला-इल्म या नाकाम है

बदचलन,बदरंग अब तो ये सियासत हो गयी
शोर भी उसका ज़ियादा जो हुआ नाकाम है

सोचिए,क्या एक मुद्दत को सज़ा हो जायगी
एक लमहा बे-अदब था बस यही इल्ज़ाम है

फूल हैं गुलदान में जितने सभी की है महक
बस यही जम्हूरियत के वास्ते इल्हाम है

ढूंढ़ते रह जाओगे फहरिश्त में शायद कहीं
हाशिए पर ही सही लिक्खा तुम्हारा नाम है

आइने से दोस्ती अच्छी नहीं है दोस्तो
आइना तो सच-बयानी के लिए बदनाम है

हैं बहुत हैरतज़दा सब लोग बस्ती के'स्वरूप'
क्या हुआ कुछ तो हुआहै हरतरफ कुहराम है
स्वरूप

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